• चन्दन

चन्दन-अन्र्तराश्ट्रीय बाजार में भारतीय चन्दन की बढ़ती मांग के कारण चन्दन की खेती करना बहुत लाभदायक व्यवसाय साबित हो सकता है। यह पौधा मनामोहन सुगन्ध के रुप में जाना जाता है । एवं इसकी लकड़ी सब से अच्छी एवं महंगी मानी जाती है। अन्य देषों की तुलना मंे भारत में पाये जाने वाले चंदन के पेड़ो मंे खुषबु और तैल की मात्रा सबसे ज्यादा होती है। यही कारण है कि अन्तराश्ट्रीय बाजार में भारतीय चंदन की बड़ी मांग है।

भारत के चंदन के रसदार लकड़ी की कीमत लगभग 3000 से 15000रु. प्रति किलों है। तथा बारी लकड़ी 500 से 1000रु. प्रति किलों है। चंदन का उपयोग तेल, धूप, औशधी और सौन्दर्य प्रसाधन के निर्माण मंे किया जाता है।

यह 2 डिग्री से 50 डिग्री तापमान पर भी हो जाता है। पौधा लगाने से पहले 1 फीट गहरा गडढ़ा खोद कर दूरी से पौधे लगाए जा सकते है।

इस पौधे को अधिक उर्वरकता की आवष्यकता नहीं होती है। षुरुआती दिनांे में फसल वृद्धि के दौरान खाद की आवष्यकता होती है।

10 से 12 साल के मध्य रसदार लकड़ी प्राप्त होना षुरु हो जाती है।

एक पेड़ से 30-50 किलों रसदार मिल सकती है । यानी 15 साल बाद औसतन एक पेड़ से लगभग 3-4 लाख का आमदनी प्राप्त की जा सकती है।

पेड़ो की वृद्धि इनके रखरखाव पर निर्भर करती है।

चंदन की लकड़ी, बीज, जड़ और तेल सभी उपयोगी है।

उचित जल की व्यवस्थता हो तो चंदन के पौधे कभी भी लगाया जा सकता है।

किसी भी प्रकार के नुकसान से बचने के लिए विषेशज्ञों की राय समय-समय पर लेनी चाहिए।

फल उत्पादन व आमदनी पौधे के रखरखाव एवं उनको देय पोशक तत्वों पर निर्भर करती है।